Mustafa Zaidi

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@mustafa-zaidi

Mustafa Zaidi shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Mustafa Zaidi's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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Sher

तुझ से तो दिल के पास मुलाक़ात हो गई मैं ख़ुद को ढूँडने के लिए दर-ब-दर गया — Mustafa Zaidi
तितलियाँ उड़ती हैं और उन को पकड़ने वाले सई-ए-नाकाम में अपनों से बिछड़ जाते हैं — Mustafa Zaidi
मिरी रूह की हक़ीक़त मिरे आँसुओं से पूछो मिरा मज्लिसी तबस्सुम मिरा तर्जुमाँ नहीं है — Mustafa Zaidi
हम अंजुमन में सब की तरफ़ देखते रहे अपनी तरह से कोई अकेला नहीं मिला — Mustafa Zaidi
मत पूछ कि हम ज़ब्त की किस राह से गुज़रे ये देख कि तुझ पर कोई इल्ज़ाम न आया — Mustafa Zaidi

Ghazal

Nazm

"आख़िरी बार मिलो" आख़िरी बार मिलो ऐसे कि जलते हुए दिल राख हो जाएँ कोई और तक़ाज़ा न करें चाक-ए-वादा न सिले ज़ख़्म-ए-तमन्ना न खिले साँस हमवार रहे शम्अ' की लौ तक न हिले बातें बस इतनी कि लम्हे उन्हें आ कर गिन जाएँ आँख उठाए कोई उम्मीद तो आँखें छिन जाएँ इस मुलाक़ात का इस बार कोई वहम नहीं जिस से इक और मुलाक़ात की सूरत निकले अब न हैजान ओ जुनूँ का न हिकायात का वक़्त अब न तजदीद-ए-वफ़ा का न शिकायात का वक़्त लुट गई शहर-ए-हवादिस में मता-ए-अल्फ़ाज़ अब जो कहना है तो कैसे कोई नौहा कहिए आज तक तुम से रग-ए-जाँ के कई रिश्ते थे कल से जो होगा उसे कौन सा रिश्ता कहिए फिर न दहकेंगे कभी आरिज़-ओ-रुख़्सार मिलो मातमी हैं दम-ए-रुख़्सत दर-ओ-दीवार मिलो फिर न हम होंगे न इक़रार न इनकार मिलो आख़िरी बार मिलो — Mustafa Zaidi