Rehman Faris

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    बैठे हैं चैन से कहीं जाना तो है नहीं
    हम बे-घरों का कोई ठिकाना तो है नहीं

    तुम भी हो बीते वक़्त के मानिंद हू-ब-हू
    तुम ने भी याद आना है आना तो है नहीं
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    अगर हुकूमत तुम्हारी तस्वीर छाप दे नोट पर मेरी दोस्त
    तो देखना तुम कि लोग बिल्कुल फ़ुज़ूल-ख़र्ची नहीं करेंगे
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    अगर हुकूमत तुम्हारी तस्वीर छाप दे नोट पर मेरी दोस्त
    तो देखना तुम कि लोग बिल्कुल फिजूलखर्ची नहीं करेंगे

    हमारे चंद अच्छे दोस्तों ने ये वादा ख़ुद से किया हुआ है
    कि शक्ल अल्लाह ने अच्छी दी है सो बातें अच्छी नहीं करेंगे
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    झेला है मैंने तीन सौ पैंसठ दुखों का साल
    चाहो तो पिछले बारह महीनों से पूछ लो
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    ये क्या कि जब भी मिलो पूछ के बता के मिलो
    कभी करो मुझे हैरान अचानक आ के मिलो
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    अकेलेपन से कहाँ तालमेल होता है
    खिलाड़ी इश्क में दो हों तो खेल होता है

    न लेना इश्क़ के पर्चे में सौ से कम नंबर
    यहाँ निनानवे वाला भी फेल होता है
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    बैठे हैं चैन से कहीं जाना तो है नहीं
    हम बे-घरों का कोई ठिकाना तो है नहीं

    तुम भी हो बीते वक़्त के मानिंद हू-ब-हू
    तुम ने भी याद आना है आना तो है नहीं

    अहद-ए-वफ़ा से किस लिए ख़ाइफ़ हो मेरी जान
    कर लो कि तुम ने अहद निभाना तो है नहीं

    वो जो हमें अज़ीज़ है कैसा है कौन है
    क्यूँ पूछते हो हम ने बताना तो है नहीं

    दुनिया हम अहल-ए-इश्क़ पे क्यूँ फेंकती है जाल
    हम ने तिरे फ़रेब में आना तो है नहीं

    वो इश्क़ तो करेगा मगर देख भाल के
    'फ़ारिस' वो तेरे जैसा दिवाना तो है नहीं
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    कहानी ख़त्म हुई और ऐसी ख़त्म हुई
    कि लोग रोने लगे तालियाँ बजाते हुए
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    तूने बहुत ख़राब किया है मुझे मगर
    इस शेर में ख़राब का मतलब कुछ और है
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    आपकी आँखें अगर शेर सुनाने लग जाएँ
    हम जो ग़ज़लें लिए फिरते हैं, ठिकाने लग जाएँ
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