Shayar Jamali

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Shayar Jamali shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Shayar Jamali's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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Shayari
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Sher

तुम आसमाँ की बुलंदी से जल्द लौट आना हमें ज़मीं के मसाइल पे बात करनी है — Shayar Jamali

Ghazal

मिरे नसीब का लिक्खा बदल भी सकता था वो चाहता तो मिरे साथ चल भी सकता था ये तू ने ठीक किया अपना हाथ खींच लिया मिरे लबों से तिरा हाथ जल भी सकता था उड़ाती रहती है दुनिया ग़लत-सलत बातें वो संग-दिल था तो इक दिन पिघल भी सकता था उतर गया तिरा ग़म रूह की फ़ज़ाओं में रगों में होता तो आँखों से ढल भी सकता था मैं ठीक वक़्त पे ख़ामोश हो गया वर्ना मिरे रफ़ीक़ों का लहजा बदल भी सकता था अना को धूप में रहना पसंद था वर्ना तिरे ग़ुरूर का सूरज तो ढल भी सकता था रगड़ सकी न मिरी प्यास एड़ियाँ वर्ना हर एक ज़र्रे से चश्मा उबल भी सकता था पसंद आई न टूटी हुई फ़सील की राह मैं शहर-ए-तन की घुटन से निकल भी सकता था वो लम्हा जिस ने मुझे रेज़ा-रेज़ा कर डाला किसी के बस में जो होता तो टल भी सकता था — Shayar Jamali