Sibgatullah Anwer

Sibgatullah Anwer

@sibgatimam

Sibgatullah Anwer shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Sibgatullah Anwer's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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Sher

कहाँ तुम घूमती रहती हो अकेले तुम्हें तो अपने घर जाना चाहिए था — Sibgatullah Anwer
जिस ने हर मोड़ पर धोखा दिया हो तो कैसे मुमकिन है अपना मानकर रख लूँ — Sibgatullah Anwer
है अगर तेरे हिस्से में भी कोई ग़म ला मुझे दे उसे भी मैं इधर रख लूँ — Sibgatullah Anwer
वो खड़ा है ग़ैर की चौखट पे जो वो हमारे दिल के अंदर था कभी — Sibgatullah Anwer
ख़्वाहिश हुई जो तिरे साए की तो फिर हम ने कड़ी धूप में ज़ुल्फ़ें ओढ़ लीं — Sibgatullah Anwer
जुर्म को नहीं पर मुझ को सज़ा मिली है ज़ीस्त के सफ़र में ख़ुद से वफ़ा मिली है — Sibgatullah Anwer
इश्क़ ढाई लफ़्ज़ का इक खेल है जिस ने भी खेला हुआ वो फे़ल है — Sibgatullah Anwer
मान लेता हूँ कि काफ़ी फ़ासले हैं दरमियाँ फिर भी हम ने मिलने की उम्मीद ज़िंदा रक्खी है — Sibgatullah Anwer
महफ़िल में अपनी उस को बुलाता रहा हूँ मैं फिर उस को अपने शे'र सुनाता रहा हूँ मैं — Sibgatullah Anwer
उस की बातों में खोया न कर हर दफ़ा सिर्फ़ क़िस्से हैं कोई हक़ाइक नहीं — Sibgatullah Anwer
जुदाई बा'द भी तुम ज़िंदा बचे हो तुम्हें तो कब का मर जाना चाहिए था — Sibgatullah Anwer
ये सड़क गर तुझे बेहद सताती है तो तू आ जा तुझे मैं अपने घर रख लूँ — Sibgatullah Anwer
पास आ मैं तिरे शाने पे सर रख लूँ ख़ुद को मैं दर्द से कुछ बे-ख़बर रख लूँ — Sibgatullah Anwer
वो जिसे तुम ने अभी फंदा कहा उस गले का श्रेष्ठ जेवर था कभी — Sibgatullah Anwer
जो नहीं किया उस का इत्तिहाम मुझ पर ख़ुद-सुपुर्दगी की मुझ को जज़ा मिली है — Sibgatullah Anwer
इक रोज़ उस ने पूछ लिया रंज का सबब फिर इश्क़ के फ़साने सुनाता रहा हूँ मैं — Sibgatullah Anwer
हम इश्क़ के कफ़न में दफनाए जाएँगे हम रण नहीं मोहब्बत में मारे जाएँगे — Sibgatullah Anwer
जिस के हाथों में ये ख़ंजर है अभी वो मिरी जाँ का मुक़द्दर था कभी — Sibgatullah Anwer
नक्बत तो ये है के वो हसीना मिरी नहीं ख़ुद को मगर यक़ीन दिलाता रहा हूँ मैं — Sibgatullah Anwer
ख़ुद ही अपना ध्यान रखना है मुझे इश्क़ में मैं भी क़लंदर था कभी — Sibgatullah Anwer

Ghazal