हुस्न पे जब शबाब आया है
आशिकों पे 'अज़ाब आया है
प्यार में झूमता है दिल ऐसे
जैसे पीकर शराब आया है
छत पे आहट है इक परिंदे की
उसका शायद जवाब आया है
मुझ सेे होने लगी मुहब्बत क्या
उसके ख़त में गुलाब आया है
दिल की दुनिया में रौशनी करने
बन के वो आफ़ताब आया है
याद करता है वो मुझे शायद
रात उसका ही ख़्वाब आया है
दिल में तन्हाइयों का डेरा था
'इश्क़ से इंक़िलाब आया है
ख़ैर-मक़्दम है उनके दिल का यूँँ
जैसे कोई नवाब आया है
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