dil men rakho na berukhi itni | दिल में रक्खो न बेरुख़ी इतनी

  - Anmol Shant

दिल में रक्खो न बेरुख़ी इतनी
यार दुनिया नहीं बुरी इतनी

नफ़रतों में इसे गँवाए क्यूँँ
मुख़्तसर जब है ज़िन्दगी इतनी

क्यूँ समाए न ज़ेहन में आख़िर
प्यारी सूरत है आपकी इतनी

कैसे होगा मक़ाम चाहत का
दिल में नफ़रत है गर भरी इतनी

ख़ुद में दुनिया समेट लेती है
गहरी आँखों की है नदी इतनी

ग़म बिछड़ने का गर नहीं है तो
क्यूँ है आँखों में फिर नमी इतनी

  - Anmol Shant

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