apne haathon men ujaalon ko li.e firta hooñ main | अपने हाथों में उजालों को लिए फिरता हूँ मैं

  - Meem Alif Shaz

अपने हाथों में उजालों को लिए फिरता हूँ मैं
धूप के मौसम में प्यासों को लिए फिरता हूँ मैं

जब कोई भी मुझ से मेरी बात सुनता ही नहीं
साथ अपने ज़ेहनी गूंगों को लिए फिरता हूँ मैं

कल की कोई बात मुझ से भी कभी पूछो ज़रा
एक मिसरा हूँ ज़मानों को लिए फिरता हूँ मैं

इस ज़मीँ में मुझ को दफ़नाने से बचते हैं ये लोग
शख़्स होने के हवालों को लिए फिरता हूँ मैं

इक ज़माने से उसे देखा नहीं है इसलिए
यादों में अब उस के चेहरों को लिए फिरता हूँ मैं

  - Meem Alif Shaz

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