ऐ ख़ुदा उसके दिल को ये क्या हो गया
रोते रोते वो मुझ सेे जुदा हो गया
मैं अकेला ही था ज़िन्दगी में मगर
लोग आए तो फिर क़ाफ़िला हो गया
लोग सीने से मेरे गुज़रते रहे
मैं जहाँ भी गया रास्ता हो गया
कोई बच्चा मुझे अब तो कहता नहीं
धीरे धीरे तो मैं भी बड़ा हो गया
बस इसी बात से मैं परेशान हूँ
उसकी नज़रों में मैं बेवफ़ा हो गया
जिसका पत्थर का दिल था ख़ुदा की क़सम
मेरी ग़ज़लों पे वो भी फ़िदा हो गया
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