उसे चाहने भर से मेरा हो जाए
परिंदा है कब किस शजर का हो जाए
दुआ है या फिर बद-दुआ है कि हर चीज़
मेरा हाथ लगते ही सोना हो जाए
वो दरिया सा मीठा बदन जाने कैसे
मेरा लम्स पाते ही खारा हो जाए
ज़रा समझो कुछ इतनी ज़िद मत करो 'प्रीत'
भला कैसे सब कुछ तुम्हारा हो जाए
— Prit















