durust qaum ke haalaat kyun nahin karta | दुरुस्त क़ौम के हालात क्यूँ नहीं करता

  - Shajar Abbas

दुरुस्त क़ौम के हालात क्यूँ नहीं करता
यतीम बच्चों की ख़िदमात क्यूँ नहीं करता

है हक़ परस्त तो हक़ बात क्यूँ नहीं करता
जहाँ से दूर फ़सादात क्यूँ नहीं करता

करीम है तो करामात क्यूँ नहीं करता
दुरुस्त दश्त में बरसात क्यूँ नहीं करता

सबील-ए-इश्क़ हर इक रात क्यूँ नहीं करता
वो मेरी ज़ात में ज़म ज़ात क्यूँ नहीं करता

परेशाँ हाल मुसल्ले पे बैठ कर रब से
ख़ुलूस-ए-दिल से मुनाजात क्यूँ नहीं करता

फ़िराक़-ए-यार में घुट घुट के जीना होता है
दिलों से दूर ये ख़दशात क्यूँ नहीं करता

जहाँ की रस्म-ओ-रिवाजो को दीन मत समझो
ये नस्ल-ए-नौ को हिदायात क्यूँ नहीं करता

वो आने वाला नहीं आएगा तमाम हयात
सफ़र की अपने शुरूआत क्यूँ नहीं करता

अमीर-ए-शहर अमीर-ए-जमाल मुझको बता
कि अपने हुस्न की ख़ैरात क्यूँ नहीं करता

ज़मीन-ए-दिल पे गिरे जा रहे हैं हिज्र के गुल
लहू की आँखों से बरसात क्यूँ नहीं करता

शजर हबीब मिरे जाँ निसार ऐ हमदम
ख़फ़ा नहीं है तो फिर बात क्यूँ नहीं करता

  - Shajar Abbas

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