तमाम फ़िक़्रों से आज़ाद हो गए हो तुम
यही सबब है जो ना-शाद हो गए हो तुम
किसी की यादों की ज़ंजीर दिल के पैरों में
खनक के कहती है बर्बाद हो गए हो तुम
सभी सहेलियाँ तेरी ये कह के रोने लगीं
वो हीर हो गई फ़रहाद हो गए हो तुम
जवानों करने लगे हो नमाज़-ए-इश्क़ क़ज़ा
जनाब-ए-क़ैस से अबआ'द हो गए हो तुम
लिहाज़ अपने बुज़ुर्गों का भूल मत जाना
अगरचे मीर से उस्ताद हो गए हो तुम
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