सब से मुश्किल है अज़िय्यत ये गवारा करना

दिल से उतरे हुए लोगों में गुज़ारा करना

ज़िंदगी हम पे ये आसान भी हो सकती थी
सीख लेते जो किसी दर्द का चारा करना

कहाँ जाते हो अभी साथ गुज़ारो कुछ दिन
हम पे मुश्किल कोई आए तो किनारा करना

क्या पता कौन सा ग़म जान का आज़ार बने
सीख ले दोस्त मेरे अश्क सितारा करना

कितना मुश्किल है जलाना किसी रस्ते में चराग़
कितना आसाँ है हवाओं को इशारा करना

ज़िंदगी हम तो चलो मान गए सह भी गए
ऐसा बरताव किसी से न दोबारा करना

— Akhtar Malik

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