वफ़ा उल्फ़त मुहब्बत आशिक़ी में
मिलेगी यारों जन्नत आशिक़ी में
बिज़ी रहते हैं सुबह-ओ-शाम सारे
नहीं मिलती है फ़ुर्सत आशिक़ी में
लगा के दिल किसी सुंदर बदन से
सभी करते हैं उल्फ़त आशिक़ी में
उसे मजबूर करना दिल दुखाना
नहीं करना ये हरक़त आशिक़ी में
चले ये दौर यूँँ ही 'उम्र भर को
हमें भी थी ये हसरत आशिक़ी में
कोई ख़ुदस भी प्यारा हो सके है
करोगे तुम भी हैरत आशिक़ी में
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