ye waqiya mere li.e behad ajeeb tha | ये वाक़िया मेरे लिए बेहद अजीब था

  - Daqiiq Jabaali

ये वाक़िया मेरे लिए बेहद अजीब था
हर शख़्स दूर हो गया जो जो क़रीब था

इलज़ाम दूँ किसे मैं हमारी जुदाई का
वो बेवफ़ा नहीं था मगर मैं ग़रीब था

उसको भी 'इश्क़ था प किसी और लड़के से
जो दोस्त था मेरा वही मेरा रक़ीब था

मैं बद-नसीब तेरे गले भी न लग सका
जो सोया तेरी बाँहों में वो ख़ुश-नसीब था

दौलत के मामले में वो राजा से कम नहीं
दिल से मगर वो आदमी बेहद ग़रीब था

उसने मेरे घमंड को फिर चूर कर दिया
मुझको ये लगता था कि फ़क़त मैं अरीब था

  - Daqiiq Jabaali

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