Daqiiq Jabaali

Daqiiq Jabaali

@amityadavpoetrys

Amit Yadav shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Amit Yadav's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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  • Sher
  • Ghazal
  • Nazm
इधर पे हम हैं फ़क़त तुझको जानते हैं 'दक़ीक़'
तिरी तो इस से भी उस से भी आशनाई है
Daqiiq Jabaali
आख़िरश क्यों करें ज़ाईदा नया तिफ़्ल 'अमित'
इससे बढ़िया है पिदर-मुर्दा उठा लाएँ कोई
Daqiiq Jabaali
दुख दे रही है ज़िंदगी तो तुम ही बताओ
कैसे भला मैं प्यार भरे गीत लिखूँगा
Daqiiq Jabaali
बच्चों की तरह आज बहुत फूट के रोए
हम इतने परेशाँ थे कि फिर टूट के रोए
Daqiiq Jabaali
मज़ाक उड़ाते हो ये कह के तुम ग़रीबों का
कि सिर्फ़ पैसों से सब कुछ ख़रीद नइँ सकते
Daqiiq Jabaali
मेरे क़रीब आ ज़रा नज़रें उतार दूँ
ये ज़ुल्फ़ें क्या हैं ला तेरी किस्मत सँवार दूँ

बैठी रहो यूँ ही मेरी नज़रों के सामने
तुम को निहारते हुए उम्रें गुज़ार दूँ
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Daqiiq Jabaali
वो दौर है तेज़ाब से दिल साफ़ करना पड़ता है
अब डुबकियाँ गंगा के पानी में लगाना छोड़ दो
Daqiiq Jabaali
एक बच्चा ठंड में बाहर ठिठूर कर मर गया
मख़मली चादर को ओढ़े सोए थे भगवान जी
Daqiiq Jabaali
रोज़ ये सोचता हूँ तुझ को नहीं सोचूँगा
आज का दिन भी तुझे सोचने में गुज़रा है
Daqiiq Jabaali
मान जाओ न मुहब्बत से रखूँगा तुमको
वादा करता हूँ हिफ़ाज़त से रखूँगा तुमको

तोड़ कर चाँद सितारे तो नहीं ला सकता
इतना कह सकता हूँ इज़्ज़त से रखूँगा तुमको
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Daqiiq Jabaali
नमक जराहतों पे मेरे मल गए तुम भी
हबीब ग़ैरों के जैसे निकल गए तुम भी
Daqiiq Jabaali
बीते लम्हों के साथ बैठा हूँ
तेरी यादों के साथ बैठा हूँ

चाय गाने किताब तन्हाई
अपने यारों के साथ बैठा हूँ
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Daqiiq Jabaali
ये सोचता ख़राब है कहता ख़राब है
दावे से कह रहा हूँ ये बंदा ख़राब है
Daqiiq Jabaali
दुनिया-ए-पुर-फ़रेब में माहिर न हो सका
मक्कार,चालसाज़, मैं शातिर न हो सका
Daqiiq Jabaali
लब-कुशाई तो सब ही करते हैं
और, बुराई तो सब ही करते हैं

गर निभा पाओ तो निभाओ वफ़ा
बेवफ़ाई तो सब ही करते हैं
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Daqiiq Jabaali
बस और शायरों की तरह इश्क़ मत लिखो
अपनी क़लम से प्यारे हक़ीक़त बयान कर
Daqiiq Jabaali
ये ही मेरा मिज़ाज है कोई अना नहीं
जब तक न हो ग़रज़ मेरी मैं बोलता नहीं
Daqiiq Jabaali
यूँ हर किसी के सामने खुलता नहीं अमित
गर खुल गया है तो उसे सुनिए सँभाल कर
Daqiiq Jabaali
कुछ भी हासिल नहीं होता यहाँ बिन मेहनत के
ख़ुद का साया भी मुझे धूप में आने से मिला
Daqiiq Jabaali
फूल हूँ ख़ार बनाने पे तुली है दुनिया
मुझको बेकार बनाने पे तुली है दुनिया
Daqiiq Jabaali

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