नर्म बोसे सुर्ख़ लाली वो निशानी भूल जा
याद शब भर उस परी की क्यूँँ सतायी भूल जा
एक लड़की थी जिसे पगली कहा करता था तू
एक पगली याद रख बस एक लड़की भूल जा
शाह बेगम और हम तुम दो कहानी चल रहीं
वो कहानी याद रख तू ये कहानी भूल जा
दिल जिगर सीना कलेजा ख़ाक हो जाता बदन
आँसुओं के ढेर में बस आँख जलती भूल जा
एक दिन काॅलर पकड़ वो मुझ सेे बोली ख़्वाब में
मैं भी तुझको भूल जाऊँ तू मुझे भी भूल जा
भूल जानी चाहिए वो याद अब तक याद है
याद जो रखनी थी वो फिर याद आनी भूल जा
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