dene lagii duhaai meri jaañ kii jaañ mujhe | देने लगी दुहाई मेरी जाँ की जाँ मुझे

  - A R Sahil "Aleeg"

देने लगी दुहाई मेरी जाँ की जाँ मुझे
भारी पड़ा है 'इश्क़ का ये इम्तिहाँ मुझे

किस्मत ने हाए लाके डुबोया कहाँ मुझे
चरख़ाब लग रहा है तेरा आस्ताँ मुझे

मेरी वफ़ा के बदले मुसलसल दिए हैं ज़ख़्म
मुश्किल है आप सा जो मिले मेहरबाँ मुझे

दामन से तेरे शम्स-ओ-क़मर नोच लूँगा मैं,
तू क्या समझ रहा है? बता आसमाँ मुझे

आवारगी ने तोड़ दिया है बदन तमाम
अब याद आ रहा है मिरा आशियाँ मुझे

आँखों के रास्ते तेरे दिल तक मैं आ गया
लेकिन घुटन सी होने लगी है यहाँ मुझे

जीना तो दूर ढोने से कतरा रही है अब
लगने लगी है बोझ सी अपनी ही जाँ मुझे

उसने किया इशारा मेरी सम्त बज़्म में
उँगली को देख बोले सभी मेरी जाँ मुझे

दिल भी लहूलुहान है साहिल वुजूद भी
उसकी नज़र लगे कोई नोक-ए-सिनाँ मुझे

  - A R Sahil "Aleeg"

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