tod kar saari rivaajon ke silaasil shaair | तोड़ कर सारी रिवाजों के सलासिल शाइर

  - A R Sahil "Aleeg"

तोड़ कर सारी रिवाजों के सलासिल शाइर
आज बैठा है मेरी जान मुक़ाबिल शाइर

सारी दुनिया को मुहब्बत की लुटाकर ख़ैरात
तोड़ देता है कुदूरत के फ़साइल शाइर

जाने क्या बात है उस
में कि कहीं भी पहुँचे
लूट लेता है वो अशआर से महफ़िल शाइर

हर्फ़-दर-हर्फ़ चलाता है वो जज़्बात के तीर
और कर देता है माहौल को घाइल शाइर

जो कमाई है लहू दे के सुख़न की सूरत
शेर-ख़्वानी है फ़क़त 'उम्र का हासिल शाइर

जिसका ईमान सलामत है नहीं हो सकता
शाही-दरबार या सरकार में शामिल शाइर

कश्ती-ए-दिल जो कभी वक़्त के तूफ़ाँ में फँसे
अपने हालात को हो जाता है साहिल शाइर

  - A R Sahil "Aleeg"

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