baap daada kii nibhaata hai rivaayat beta | बाप दादा की निभाता है रिवायत बेटा

  - A R Sahil "Aleeg"

बाप दादा की निभाता है रिवायत बेटा
हम से हर काम की लेता है इजाज़त बेटा

ख़ुश-नसीबी है कि कुछ सीख गया कम से कम
कुछ न कर पाया तो कर लेगा मोहब्बत बेटा

ख़ाक में इस को मिला देना कि रखना महफ़ूज़
सौंप कर चल दिए हम तुम को विरासत बेटा

जाने किस क़ौम की तहज़ीब दर आई इस में
बाप से रखने लगा खुल के अदावत बेटा

सिर्फ़ बेटी ही नहीं करता अता वो सबको
लोग पाते हैं ख़ुदा की ही बदौलत बेटा

काट देता है बुज़ुर्गों की हर इक बात को वो
जाने क्या सीखा पढ़ा जा के विलायत बेटा

इस से अच्छी तो तवायफ़ है ये कोठे वाली
आज कल मुल्क में जैसी है सियासत बेटा

बाद मरने के मेरे किस से कहोगे दिल की
जितनी करनी है अभी कर लो शिकायत बेटा

सब के माँ बाप की साहिल ये रही है ख़्वाहिश
चाहे जैसा हो रहे शाद-ओ-सलामत बेटा

  - A R Sahil "Aleeg"

More by A R Sahil "Aleeg"

As you were reading Shayari by A R Sahil "Aleeg"

Similar Writers

our suggestion based on A R Sahil "Aleeg"

Similar Moods

As you were reading undefined Shayari