ye soch rakkha tha unse karunga chaar sawaal | ये सोच रक्खा था उनसे करूँँगा चार सवाल

  - A R Sahil "Aleeg"

ये सोच रक्खा था उनसे करूँँगा चार सवाल
मगर वो आए मुक़ाबिल हुए फ़रार सवाल

जवाब माँग रहे थे वो इस क़दर मुझसे
किसी से लाए हों जैसे कोई उधार सवाल

मैं ओढ़ बैठा हूँ मुद्दत से यूँँ भी ख़ामोशी
जो पूछ बैठा तो गुज़रेंगे ना-गवार सवाल

बताओ कैसे लगे तुमको मेरे नाज़-ओ-नक़्श
हर इक से करता है वो ये सदा-बहार सवाल

लगे वो खींचने लफ़्ज़ों के जाल को ऐसे
के एक लम्हे में कर डाले तार-तार सवाल

नज़र मिलाते हुए उससे डर रहा है नगर
करे तो कैसे करे उनसे कोई चार सवाल

अजीब दौर है 'साहिल' हमीं को कर के क़त्ल
उठा रहा है हमीं पर गुनाहगार सवाल

  - A R Sahil "Aleeg"

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