yaad rakkhega meraa kaun fas | याद रक्खेगा मेरा कौन फ़साना मेरे दोस्त

  - Ashfaq Nasir

याद रक्खेगा मेरा कौन फ़साना मेरे दोस्त
मैं न मजनूँ हूँ न मजनूँ का ज़माना मेरे दोस्त

हिज्र इंसाँ के ख़द-ओ-ख़ाल बदल देता है
कभी फ़ुर्सत में मुझे देखने आना मेरे दोस्त

शाम ढलने से फ़क़त शाम नहीं ढलती है
'उम्र ढल जाती है जल्दी पलट आना मेरे दोस्त

रोज़ कुछ लोग मेरे शहर में मर जाते हैं
ऐन मुमकिन है ठहर कर चले जाना मेरे दोस्त

तुम अगर अब भी खंडर देख के ख़ुश होते हो
तो किसी दिन मेरी जानिब निकल आना मेरे दोस्त

जैसे मिट्टी को हवा साथ लिए फिरती है
मैं कहाँ और कहाँ मेरा ठिकाना मेरे दोस्त

  - Ashfaq Nasir

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