बे-वफ़ाओं की उल्फ़त जल्द से नहीं मिलती
अब यहाँ कोई शोहरत जल्द से नहीं मिलती
यार कुछ नहीं होता सिर्फ़ दिल लगाने से
सच है 'इश्क़ में फ़रहत जल्द से नहीं मिलती
है ये मेरी मजबूरी रहता हूँ सदा मसरूफ़
तुझ सेे मिलने की फ़ुर्सत जल्द से नहीं मिलती
बिन कमाए धन दौलत आज यार मर्दों को
इस ज़माने में इज़्ज़त जल्द से नहीं मिलती
बच हराम कामों से डर ख़ुदास 'दानिश' तू
वरना रब की यूँँ रहमत जल्द से नहीं मिलती
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