Meaning of

अल्फाज़

alfaaz • الفاظ

शब्द; अभिव्यक्तियाँ

words; expressions

الفاظ; اظہار

Arabic

मिरी ज़बान से अल्फ़ाज़ कोई निकले गर
तिरी ज़बान सा अंदाज़-ए-गुफ़्तगू आए

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अगर पलक पे है मोती तो ये नहीं काफ़ी
हुनर भी चाहिए अल्फ़ाज़ में पिरोने का

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मुझे भी बख़्श दे लहजे की ख़ुश-बयानी सब
तेरे असर में हैं अल्फ़ाज़ सब, मआ'नी सब

मेरे बदन को खिलाती है फूल की मानिंद
कि उस निगाह में है धूप, छाँव, पानी सब

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तल्ख़ बातों से ही मल्बूस न रहती है ज़बाँ
मीठे अल्फ़ाज़ ज़बानों को क़बा देते हैं

मैली पोशाक लपेटे वो मलंगों से लोग
मस्त होने पे ख़ुदा तक भी बना देते हैं

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ग़ज़ल को कुछ नए चेहरे नए अश'आर देता हूँ
मैं यूँँ अल्फ़ाज़ के ख़ंजर को अपने धार देता हूँ

कभी जब तैश में चाहूँ किसी का क़त्ल करना मैं
तो फिर ग़ुस्से में आ कर शे'र कोई मार देता हूँ

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हो गया ख़ामोश मैं भी देख लो आ कर सभी
मर गया अल्फ़ाज़ को शीरीं बनाने का हुनर

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सजाता क्यूँँ बदन अल्फ़ाज़ से जज़्बात का अपने
फ़क़त आँखों ही आँखों में नज़र पुर-आरज़ू होती

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उसी अंदाज़ में अल्फ़ाज़ के अश'आर सुनते हैं
करें कोशिश बदलने की नए अलफ़ाज़ चुनते हैं

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कितने अल्फाज़ मचलते हैं सँवरने के लिए
जब ख़यालों में कोई  शे'र उभर आता है

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गूँथता रहता हूँ अल्फ़ाज़ को आटे की तरह
बावुजूद इस के मुझे रोटी मुयस्सर न हुई

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मिरी ज़बान से अल्फ़ाज़ कोई निकले गर
तिरी ज़बान सा अंदाज़-ए-गुफ़्तगू आए

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अगर पलक पे है मोती तो ये नहीं काफ़ी
हुनर भी चाहिए अल्फ़ाज़ में पिरोने का

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'अल्फाज़' केवल शब्द नहीं हैं; ये विचार और भावना के वाहक हैं। कविता में, ये अपने शाब्दिक अर्थ से परे जाकर अभिव्यक्ति की धड़कन बन जाते हैं, अनकहे का भार उठाते हुए।

कवि 'अल्फाज़' को अर्थ की जटिल बुनावट में बुनते हैं, जहाँ प्रत्येक शब्द भावना के कपड़े में एक धागा होता है। इनका उपयोग चित्रण उत्पन्न करने, आत्मा को झकझोरने और गहरी सच्चाइयों को व्यक्त करने के लिए किया जाता है।

कविता में, 'अल्फाज़' कवि के दिल की मौन गूंज हैं, जो पाठक की आत्मा के साथ प्रतिध्वनित होती हैं।