Meaning of

उम्र-ए-ख़िज़्र

umr-e-khizr • خیرو

ख़िज़्र की उम्र; अमर जीवन

life of Khizr; eternal life

خضر کی عمر; ابدی زندگی

Arabic

हम ऐसा कहने वाले जब तलक है ग़ज़ल बंदूक़ पर भारी रहेगी — Ali Zaryoun
यूँंँ हक़ जताते मैं ग़ज़ल हूँ वो तख़ल्लुस है कोई बहरों में करते क़ैद मिसरे रब्त में होते नहीं — Priya omar
सिर झुकाऊँगा सब को भरोसा न था देख कर मैं तुझे ख़ुद-ब-ख़ुद झुक गया — Shubham Rai 'shubh'
जिस ने गंगा में वुज़ू कर के नमाज़े हैं पढ़ी वो कभी मुल्क के ग़द्दार नहीं हो सकते — Mohammad Aquib Khan
हाँ मैं तो लिए फिरता हूँ इक सजदा-ए-बेताब उन से भी तो पूछो वो ख़ुदा हैं कि नहीं हैं — Hafeez Jalandhari
बे-गिनती बोसे लेंगे रुख़-ए-दिल-पसंद के आशिक़ तिरे पढ़े नहीं इल्म-ए-हिसाब को — Haidar Ali Aatish
छोड़ जाओ मुझे आइना देख लो ख़ूब-सूरत नहीं एक ग़द्दार हो — Trinetra Dubey

कविता की गहराइयों में, 'उम्र-ए-ख़िज़्र' उस कालातीतता और ज्ञान का आभास कराता है जो ख़िज़्र से जुड़ा है, जो अपनी अमरता और मार्गदर्शन के लिए जाने जाते हैं। कविता ने इस शब्द को अमरता और शाश्वत ज्ञान की खोज के विषयों को तलाशने के लिए अपनाया है।

'उम्र-ए-ख़िज़्र' का उपयोग कवि अक्सर अमर जीवन की इच्छा को दर्शाने के लिए करते हैं। यह मानव अस्तित्व की क्षणभंगुरता के विपरीत प्रयोग होता है। यह शब्द उस ज्ञान का प्रतीक भी हो सकता है जो समय से परे है।

कविता में, 'उम्र-ए-ख़िज़्र' ज्ञान की शाश्वत खोज और अमरता के लिए मानव की लालसा का प्रतीक बन जाता है।