Meaning of

कर्र-ओ-फ़र्र

karr-o-farr • کر و فر

धूमधाम; भव्यता

pomp and show; grandeur

دھوم دھام; شان و شوکت

Persian

मैं भटकता ही रहा दश्त-ए-शनासाई में कोई उतरा ही नहीं रूह की गहराई में क्या मिलाया है बता जाम-ए-पज़ीराई में ख़ूब नश्शा है तेरी हौसला-अफ़जाई में तेरी यादों की सुई, प्रेम का धागा मेरा काम आए हैं बहुत ज़ख़्मों की तुरपाई में डस रही है ये सियह-रात की नागिन मुझ को भर रही ज़हर-ए-ख़मोशी, रग-ए-तन्हाई में सुर्मा-ए-मक्र-ओ-फ़रेब आँखों में जब से है लगा तब से है ख़ूब इज़ाफ़ा हद-ए-बीनाई में फ़िक्र-ओ-फ़न, रंग-ए-तग़ज़्ज़ुल, न ग़ज़ल की ख़ुशबू बस लगा रहता हूँ मैं क़ाफ़िया-पैमाई में सीख पानी से हुनर काम 'अनीस' आएगा दौड़ कर ख़ुद ही चला आता है गहराई में — Anis shah anis
अपनी हयात काट के मक्र-ओ-फ़रेब में बच्चों से कह रहे हैं बुरे काम मत करो — Shajar Abbas

यह शब्द वैभव और भव्यता की छवियों को उकेरता है, एक ऐसी दुनिया जो ऐश्वर्य से सजी है। कविता में, यह अक्सर सांसारिक महिमा की क्षणभंगुर प्रकृति को दर्शाता है, एक क्षणिक तमाशा जो चकाचौंध करता है फिर भी फीका पड़ जाता है।

कवि इसे धन और शक्ति की सतहीता की आलोचना करने के लिए उपयोग करते हैं। यह उन क्षणों की खट्टे-मीठे सौंदर्य को भी उकेर सकता है जो भव्य हैं फिर भी क्षणभंगुर। अक्सर, यह सादगी और विनम्रता के विपरीत होता है।

कविता में, भव्यता एक उत्सव और एक चेतावनी दोनों है, जीवन की क्षणभंगुर भव्यता की याद दिलाती है।