मकर-ओ-फ़रेब ज़ुल्म जहालत फ़ुजूर सेगुस्ताख़ियों के दहर से ख़ुद को निकाल लोतहज़ीब-ओ-इल्म-ओ-फ़न ये तमद्दुन अदब शजरलो अपने ख़ानवादे का विरसा सँभाल लो— Shajar Abbas