Meaning of

कहकशाँ

kahkashaan • کہکشاں

आकाशगंगा; मिल्की वे

galaxy; milky way

کہکشاں; دودھیا راستہ

Persian

ये आफ़ताब-ओ-क़मर कहकशाँ ख़ुदा की क़सम
तुम्हारे चेहरा-ए-अनवर से नूर लेते हैं

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अज़ कबीर-ओ-रंग-ए-केसर और गुलाल
अब्र छाया है सफ़ेद-ओ-ज़र्द-ओ-लाल

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अभी दिल में फिर एक ख़्वाहिश उगी है
नज़र कहकशाँ पर ही आ कर टिकी है

वो इक दौर था जुगनुओं से मुकम्मल
लगी अब तो बस चाँद पर टक-टकी है

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कहकशाँ क़मर सूरज आसमान दे देंगे
तुम को जान तोहफ़े में दो जहान दे देंगे

दिल तो एक छोटी सी शय है माँगकर देखो
जान-ए-जान तुम को हम अपनी जान दे देंगे

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कहकशाँ देख ज़मीं पर किसी मकतब जा कर
कितने तारे तो चटाई पे पड़े मिलते हैं

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ख़बर तेरी ज़रा सी चाहिए बस
मुझे क्या चाँद तारे कहकशाँ से

सिवा आँसू के कुछ मिलना नहीं है
तवक़्क़ो कुछ न रख मुझ रायगाँ से

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एक दिन आह-ओ-फ़ुगाँ से ऊब कर
चल पड़े हम दास्ताँ से ऊब कर

आख़िरश मेरा भी मक़सद बन गया
धूल बनना कहकशाँ से ऊब कर

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जब भी उस शोख़ लब-ए-लाल की लाली देखूॅं
उस की हर दीद में ईद और दिवाली देखूॅं

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वहाँ ऊपर ख़ला में कहकशाँ में कौन रहता है
फ़लक के पार जो है उस जहाँ में कौन रहता है

टहल आए हैं वैसे तो बशर हम चाँद तक लेकिन
सवाल अब भी वही है आसमाँ में कौन रहता है

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रन में हमारे हाल पे क़ातिल भी रोएगा
आँखें भी ख़ून रोएँगी ये दिल भी रोएगा

ये अर्श फ़र्श शम्स क़मर और कहकशाँ
सारे शजर परिंद ये साहिल भी रोएगा

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ये आफ़ताब-ओ-क़मर कहकशाँ ख़ुदा की क़सम
तुम्हारे चेहरा-ए-अनवर से नूर लेते हैं

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अज़ कबीर-ओ-रंग-ए-केसर और गुलाल
अब्र छाया है सफ़ेद-ओ-ज़र्द-ओ-लाल

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अपने मूल अर्थ में, 'कहकशाँ' ब्रह्मांड की विशालता और रहस्य को दर्शाता है, सितारों का एक आकाशीय मार्ग जो रात के आकाश में फैला होता है। कविता में, यह अनंत, अप्राप्य और उस दिव्य सुंदरता का प्रतीक बन जाता है जो मानव समझ से परे है।

'कहकशाँ' का उपयोग कवि अक्सर आश्चर्य और लालसा की भावना को जागृत करने के लिए करते हैं। यह सपनों, आकांक्षाओं या किसी की कल्पना की विशालता का प्रतीक हो सकता है। यह सांसारिक चिंताओं के विपरीत, अलौकिक और शाश्वत को उजागर करता है।

कविता के क्षेत्र में, 'कहकशाँ' हमें असीम और सुंदर की खोज करने के लिए आमंत्रित करता है, हमें तत्काल से परे देखने और अनंत को अपनाने के लिए प्रेरित करता है।