है मोहब्बत मुझे फ़लाने से
दुनिया पा लूँगा उसको पाने से
दोस्त अपना तुझे बनाने से
दुश्मनी हो गई ज़माने से
ज़िन्दगी लग रही है सहरा सी
बा-ख़ुदा इक तुम्हारे जाने से
दिल जलाओ फ़िराक़-ए-यार में तुम
रौशनी होगी दिल जलाने से
और ऊँचा हुआ है सर मेरा
तेरी चौख़ट पे सर झुकाने से
पहले वो बिन मनाए राज़ी था
रूठ जाता है अब मनाने से
तुर्बत-ए-क़ैस से ये आई सदा
'इश्क़ मिटता नहीं मिटाने से
ऐ मेरा दिल दुखाने वाले बता
क्या मिला दिल मेरा दुखाने से
कैसे करती भला वफ़ा मुझसे
थी वो इक बे वफ़ा घराने से
ख़त्म हो जाएँगे शजर हम तुम
एक दूजे के दूर जाने से
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