अभी दिल में फिर एक ख़्वाहिश उगी हैनज़र कहकशाँ पर ही आ कर टिकी हैवो इक दौर था जुगनुओं से मुकम्मललगी अब तो बस चाँद पर टक-टकी है— Saurabh Mehta 'Alfaaz'