वहाँ ऊपर ख़ला में कहकशाँ में कौन रहता हैफ़लक के पार जो है उस जहाँ में कौन रहता हैटहल आए हैं वैसे तो बशर हम चाँद तक लेकिनसवाल अब भी वही है आसमाँ में कौन रहता है— Mohit Subran