Meaning of

खडा

khada • کھڑا

खड़ा; सीधा; तना हुआ

standing; upright; erect

کھڑا; سیدھا; تناؤ

Sanskrit

सदियों से किनारे पे खड़ा सूख रहा है
इस शहर को दरिया में गिरा देना चाहिए

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मैं तो ग़ज़ल सुना के अकेला खड़ा रहा
सब अपने अपने चाहने वालों में खो गए

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ये मयकशों का तवाज़ुन भी क्या तवाज़ुन है
खड़े भी रहना सहूलत से लड़खड़ाना भी

हमारे शहर के लोगों को ख़ूब आता है
किसी को सर पे बिठाना भी और गिराना भी

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ये किस के द्वार पे खड़ा ज़िंदा दरख़्त है
इन पत्थरों के शहर में इंसान कौन है

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खड़ा हूँ आज भी रोटी के चार हर्फ़ लिए
सवाल ये है किताबों ने क्या दिया मुझ को

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सर्दी है कि इस जिस्म से फिर भी नहीं जाती
सूरज है कि मुद्दत से मिरे सर पर खड़ा है

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गुज़िश्ता साल शायद ठीक से मारा नहीं था
ये रावण इस बरस फिर सामने तनकर खड़ा है

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मैं बाग़ में जिस जगह खड़ा हूँ
हर फूल से काम चल रहा है

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मुझे डर ही नहीं बिल्कुल किसी का
मिरे जब साथ में मौला खड़ा है

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ज़हीफ़ी इस लिए मुझ को सुहानी लग रही है
इसे कमाने में पूरी जवानी लग रही है

नतीजा ये है कि बरसों तलाश-ए-ज़ात के बा'द
वहाँ खड़ा हूँ जहाँ रेत पानी लग रही है

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सदियों से किनारे पे खड़ा सूख रहा है
इस शहर को दरिया में गिरा देना चाहिए

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मैं तो ग़ज़ल सुना के अकेला खड़ा रहा
सब अपने अपने चाहने वालों में खो गए

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'खड़ा' उपस्थिति और दृढ़ता की भावना को व्यक्त करता है। कविता में, यह अक्सर शक्ति, दृढ़ संकल्प, और चुनौतियों का सामना करने की क्षमता का प्रतीक होता है।

कवि 'खड़ा' का उपयोग अटल संकल्प को चित्रित करने के लिए करते हैं। यह एक चरित्र की नैतिक स्थिति, प्रकृति की स्थिरता, या मानवता की स्थायी भावना को चित्रित कर सकता है।

खड़ा स्थायी भावना का प्रमाण है, जड़ें जमाए हुए फिर भी आसमान की ओर बढ़ता हुआ।