Meaning of

ख़फा

khafa • منت

नाराज़; अप्रसन्न

angry; displeased

ناراض; ناخوش

Arabic

यार इस
में तो मज़ा है ही नहीं
कोई भी हम सेे ख़फ़ा है ही नहीं
इश्क़ ही इश्क़ है महसूस करो
और कुछ इस के सिवा है ही नहीं

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मना भी लूँगा गले भी लगाऊँगा मैं 'अली'
अभी तो देख रहा हूँ उसे ख़फ़ा कर के

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आज पहली दफ़ा लगा मुझ को
वो ज़रा बे-वफ़ा लगा मुझ को

बस बिना बात ही बिगड़ता था
बेवजह ही ख़फ़ा लगा मुझ को

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बेवजह मुझ सेे फिर ख़फ़ा क्यूँ है
ये कहानी ही हर दफ़ा क्यूँ है

कुछ भी मजबूरी तो नहीं दिखती
मैं क्या जानूं वो बे-वफ़ा क्यूँ है

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हज़ारों मन्नतों पर भी कोई बोसा नहीं मिलता
किसी सूरत में उस कंजूस के बटुए नहीं खुलते

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उसी का मुन्तज़िर भी है हमारा दिल
उसी को भूलना भी चाहते है हम

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किस किस को बताएँगे जुदाई का सबब हम
तू मुझ से ख़फ़ा है तो ज़माने के लिए आ

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तुम मुहब्बत से नहीं मुझ सेे ख़फ़ा हो शायद
तुम अगर चाहो तो पिंजरा भी बदल सकते हो

मुंतज़िर हूँ मैं सो नंबर भी नहीं बदलूँगा
और तुम शहर का नक़्शा भी बदल सकते हो

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मुंतज़िर हूँ कि सितारों की ज़रा आँख लगे
चाँद को छत पे बुला लूँगा इशारा कर के

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गले लगाएँ बलाएँ लें तुम को प्यार करें
जो बात मानो तो मिन्नत हज़ार बार करें

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यार इस
में तो मज़ा है ही नहीं
कोई भी हम सेे ख़फ़ा है ही नहीं
इश्क़ ही इश्क़ है महसूस करो
और कुछ इस के सिवा है ही नहीं

47

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मना भी लूँगा गले भी लगाऊँगा मैं 'अली'
अभी तो देख रहा हूँ उसे ख़फ़ा कर के

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'ख़फा' शब्द में एक शांत असंतोष का भाव है, जो अक्सर व्यक्तिगत चोट से भरा होता है। कविता में, यह एक चुपचाप घायल दिल की छवि प्रस्तुत करता है, जो भावनात्मक दूरी का सूक्ष्म लेकिन गहरा अभिव्यक्ति है।

कवि अक्सर 'ख़फा' का उपयोग प्रेमियों के बीच अनकही तनाव को व्यक्त करने के लिए करते हैं। यह एक गहरी महसूस की गई, लेकिन अनकही दरार का संकेत देता है। यह शब्द खुले गुस्से के विपरीत भी हो सकता है, जो अनदेखी शिकायतों के शांत दर्द को उजागर करता है।

अपनी शांति में, 'ख़फा' दिल के मौन उथल-पुथल की गहराई को व्यक्त करता है।