Meaning of

ख़ल्क़

khalk • خلق

सृष्टि; लोग; मानवजाति

creation; people; mankind

تخلیق; لوگ; انسانیت

Arabic

अपनी गली में मुझ को न कर दफ़्न बाद-ए-क़त्ल मेरे पते से ख़ल्क़ को क्यूँँ तेरा घर मिले — Mirza Ghalib
हाँ शख़्स था तो मैं सही, उम्मीद करने ख़्वाब की अफ़सोस के ख़ल्क़त रही है ख़्वाब की ख़ातिर ग़लत — Zain Aalamgir
चंद दिन को तख़्त पर हैं आप इसे मंज़िल न समझें गो अभी ख़ामोश है पर ख़ल्क़ को बुज़दिल न समझें — Ibn E Murad
ख़ल्क़-ए-आदम से आज तक अकबर कोई हक़ को छुपा नहीं पाया — ''Akbar Rizvi"
है ज़माना बस रही ख़िल्क़त नहीं है फ़साना बस रही लज़्ज़त नहीं — Atif khan
जबीन-ए-दिल पे किया पहले ख़ल्क़ चेहरा-ए-जाँ फिर उस का आँखों के होंठों से हम ने बोसा लिया — Shajar Abbas
ऐ नए साल बता तुझ में नया-पन क्या है हर तरफ़ ख़ल्क़ ने क्यूँ शोर मचा रक्खा है — Faiz Ludhianvi

ख़ल्क़ सृजन के कार्य और स्वयं सृजित प्राणियों को संदर्भित करता है। कविता में, यह अक्सर मानवता की विशालता और सभी जीवित चीजों की परस्पर संबंधता का प्रतीक होता है, जो अस्तित्व के साझा सार को उजागर करता है।

कवि ख़ल्क़ का उपयोग मानवता के भीतर एकता और विविधता के विषयों का पता लगाने के लिए करते हैं। यह सभी लोगों की साझा उत्पत्ति और नियति की याद दिलाता है, जो अक्सर व्यक्तिगत संघर्षों और विजय के विपरीत होता है।

ख़ल्क़ मानवता की साझा यात्रा पर चिंतन के लिए आमंत्रित करता है। यह विविधता में पाई जाने वाली एकता और उन सामान्य धागों की बात करता है जो हम सभी को बांधते हैं।