नाम आया जो मिरे मन में तिरातेरी तस्वीर ख़ल्क़ करने लगाकर के तस्वीर फिर मैं ख़ल्क़ तिरीउसमें मैं रंग-ए-सुर्ख़ भरने लगा— Shajar Abbas