Meaning of

ख़ुम

khum • خم

मदिरा पात्र; प्याला

wine jar; goblet

شراب کا برتن; پیالہ

Persian

जो दुनिया को सुनाई दे उसे कहते हैं ख़ामोशी जो आँखों में दिखाई दे उसे तूफ़ान कहते हैं — Rahat Indori
मैं ने चाहा था ज़ख़्म भर जाएँ ज़ख़्म ही ज़ख़्म भर गए मुझ में — Ammar Iqbal
किसी के ज़ख़्म पर चाहत से पट्टी कौन बाँधेगा अगर बहनें नहीं होंगी तो राखी कौन बाँधेगा — Munawwar Rana
तेरे लगाए हुए ज़ख़्म क्यूँँ नहीं भरते मेरे लगाए हुए पेड़ सूख जाते हैं — Tehzeeb Hafi
लोग काँटों से बच के चलते हैं मैं ने फूलों से ज़ख़्म खाए हैं — Unknown
तुम बड़े अच्छे वक़्त पर आए आज इक ज़ख़्म की ज़रूरत थी — Zubair Ali Tabish

'ख़ुम' सभाओं की छवियों और साझा क्षणों की गर्माहट को दर्शाता है। कविता में, यह जीवन के नशे, आनंद और दुःख के पात्र, और स्वतंत्र रूप से बहने वाली भावनाओं के मिश्रण का प्रतीक है।

कवि 'ख़ुम' का उपयोग जीवन के अनुभवों की समृद्धि को व्यक्त करने के लिए करते हैं। यह भोग और चिंतन का प्रतीक है, उत्सवों और विचारों का मौन साक्षी। यह खालीपन के विपरीत है, जीवन की पूर्णता को उजागर करता है।

'ख़ुम' जीवन के नशे का पात्र है, साझा क्षणों में पाई जाने वाली समृद्धि की याद दिलाता है।