Meaning of

ख़ुश-बू

khush-boo • خوشبو

सुगंध; मनभावन गंध

fragrance; pleasant smell

خوشبو; خوشگوار مہک

Persian

वो तो ख़ुश-बू है हवाओं में बिखर जाएगा
मसअला फूल का है फूल किधर जाएगा

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पहले उस की ख़ुशबू मैं ने ख़ुद पर तारी की
फिर मैं ने उस फूल से मिलने की तैयारी की

इतना दुख था मुझ को तेरे लौट के जाने का
मैं ने घर के दरवाज़ों से भी मुँह मारी की

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तुम ने कैसे उस के जिस्म की ख़ुशबू से इनकार किया
उस पर पानी फेंक के देखो कच्ची मिट्टी जैसा है

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ख़ुश्बू की बरसात नहीं कर पाते हैं
हम ख़ुद ही शुरुआत नहीं कर पाते हैं

जिस लड़की की बातें करते हैं सब सेे
उस लड़की से बात नहीं कर पाते हैं

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नई फ़स्लों को ये कुछ और से कुछ और करते हैं
गुलाबों की जो ख़ुशबू ढूॅंढ़ते हैं रातरानी में

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तेरी ख़ुशबू को क़ैद में रखना
इत्रदानों के बस की बात नहीं

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चाँद चेहरा ज़ुल्फ़ दरिया बात ख़ुशबू दिल चमन
इक तुम्हें दे कर ख़ुदा ने दे दिया क्या क्या मुझे

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तिलिस्म-ए-यार ये पहलू निकाल लेता है
कि पत्थरों से भी ख़ुशबू निकाल लेता है

है बे-लिहाज़ कुछ ऐसा की आँख लगते ही
वो सर के नीचे से बाजू निकाल लेता है

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मैं ने बस इतना पूछा था क्या देखते हो भला
मैं ने ये कब कहा था मुझे देखना छोड़ दो

गीली मिट्टी की ख़ुशबू मुझे सोने देती नहीं
मेरे बालों में तुम उँगलियाँ फेरना छोड़ दो

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ये तेरे ख़त ये तेरी ख़ुशबू ये तेरे ख़्वाब-ओ-ख़याल
मता-ए-जाँ हैं तेरे कौल और क़सम की तरह

गुज़िश्ता साल मैं ने इन्हें गिनकर रक्खा था
किसी ग़रीब की जोड़ी हुई रक़म की तरह

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वो तो ख़ुश-बू है हवाओं में बिखर जाएगा
मसअला फूल का है फूल किधर जाएगा

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पहले उस की ख़ुशबू मैं ने ख़ुद पर तारी की
फिर मैं ने उस फूल से मिलने की तैयारी की

इतना दुख था मुझ को तेरे लौट के जाने का
मैं ने घर के दरवाज़ों से भी मुँह मारी की

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'ख़ुश-बू' शब्द सुगंध की नाज़ुक और क्षणभंगुर प्रकृति को याद दिलाता है। कविता में, यह अक्सर क्षणिक सुंदरता, यादें, और किसी चीज़ या व्यक्ति की अदृश्य लेकिन गहराई से महसूस की जाने वाली उपस्थिति का प्रतीक होता है। यह शब्द भावनात्मक भार लिए होता है, जो नॉस्टेल्जिया और लालसा को जगाता है।

कवि 'ख़ुश-बू' का उपयोग स्मृति और इच्छा से जुड़े भावनाओं को जगाने के लिए करते हैं। यह जीवन और प्रेम की क्षणभंगुर प्रकृति का प्रतीक हो सकता है। यह शब्द अक्सर रोमांटिक संदर्भों में प्रकट होता है, किसी क्षण या प्रिय की उपस्थिति के सार को पकड़ता है।

कविता के क्षेत्र में, 'ख़ुश-बू' उस चीज़ के सार को पकड़ता है जो महसूस की जाती है लेकिन देखी नहीं जाती, ठोस और अलौकिक के बीच एक पुल।