
पहले उस की ख़ुशबू मैं ने ख़ुद पर तारी की
फिर मैं ने उस फूल से मिलने की तैयारी की
इतना दुख था मुझ को तेरे लौट के जाने का
मैं ने घर के दरवाज़ों से भी मुँह मारी की
— Tehzeeb Hafi
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