ये किस तरह का तअल्लुक़ है आप का मेरे साथ
मुझे ही छोड़ के जाने का मशवरा मेरे साथ
यही कहीं हमें रस्तों ने बद-दुआ दी थी
मगर मैं भुल गया और कौन था मेरे साथ
वो झांकता नहीं खिड़की से दिन निकलता है
तुझे यक़ीन नहीं आ रहा तो आ मेरे साथ
— Tehzeeb Hafi
मुझे ही छोड़ के जाने का मशवरा मेरे साथ
यही कहीं हमें रस्तों ने बद-दुआ दी थी
मगर मैं भुल गया और कौन था मेरे साथ
वो झांकता नहीं खिड़की से दिन निकलता है
तुझे यक़ीन नहीं आ रहा तो आ मेरे साथ
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