Meaning of

खा़र

khaar • خار

काँटा; चुभन; कठिनाई

thorn; prick; hardship

کانٹا; چبھن; مشکل

Arabic

हुस्न बला का क़ातिल हो पर आख़िर को बेचारा है इश्क़ तो वो क़ातिल जिस ने अपनों को भी मारा है ये धोखे देता आया है दिल को भी दुनिया को भी इस के छल ने खार किया है सहरा में लैला को भी — Jaun Elia
एक तितली से वा'दा है सो गुलशन में, ग़लती से भी ख़ार नहीं देखूँगा मैं (ख़ार- काँटे ) — Darpan
ये धोखे देता आया है दिल को भी दुनिया को भी इस के छल ने खार किया है सहरा में लैला को भी — Jaun Elia
मैं ने अपनी ग़ज़लें खारिज कर डाली सोचो मेरी जान तुम्हारा क्या होगा — Talib Toofani
बहरस ख़ारिज हूँ ये मालूम है पर तुम्हारी ही ग़ज़ल का शे'र हूँ — Gyan Prakash Akul
तुम कली पर निखार आने दो देखना डाल ख़ुद झटक देगी — Vishal Bagh
माना कि इस ज़मीं को न गुलज़ार कर सके कुछ ख़ार कम तो कर गए गुज़रे जिधर से हम — Sahir Ludhianvi

'ख़ार' का मूल अर्थ काँटा है, जो छोटा होते हुए भी चुभन और दर्द का कारण बनता है। कविता में, यह शब्द जीवन की सूक्ष्म परंतु तीव्र चुनौतियों का प्रतीक बन जाता है, वे छोटी-छोटी तकलीफ़ें जो मिलकर एक बड़े भावनात्मक बोझ का रूप ले लेती हैं।

कवि अक्सर 'ख़ार' का प्रयोग अप्राप्त प्रेम की पीड़ा या दिल की संघर्षों को व्यक्त करने के लिए करते हैं। यह फूल की कोमलता के विपरीत होता है, जिससे सुंदरता और दर्द की द्वैतता उजागर होती है।

कविता में, 'ख़ार' जीवन के अनिवार्य दुखों का प्रतीक बन जाता है, जो हमें उन कठिनाइयों के साथ आने वाली सुंदरता की याद दिलाता है।