Meaning of

खा़र

khaar • خار

काँटा; चुभन; कठिनाई

thorn; prick; hardship

کانٹا; چبھن; مشکل

Arabic

माना कि इस ज़मीं को न गुलज़ार कर सके
कुछ ख़ार कम तो कर गए गुज़रे जिधर से हम

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हुस्न बला का क़ातिल हो पर आख़िर को बेचारा है
इश्क़ तो वो क़ातिल जिस ने अपनों को भी मारा है

ये धोखे देता आया है दिल को भी दुनिया को भी
इस के छल ने खार किया है सहरा में लैला को भी

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तेरा चेहरा सुब्ह का तारा लगता है
सुब्ह का तारा कितना प्यारा लगता है

तुम से मिल कर इमली मीठी लगती है
तुम से बिछड़ कर शहद भी खारा लगता है

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उम्र गुज़री है माँजते ख़ुद को
साफ़ हैं पर चमक नहीं पाए

डाल ने फूल की तरह पाला
ख़ार थे ना महक नहीं पाए

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बहरस ख़ारिज हूँ ये मालूम है
पर तुम्हारी ही ग़ज़ल का शे'र हूँ

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एक तितली से वा'दा है सो गुलशन में,
ग़लती से भी ख़ार नहीं देखूँगा मैं

(ख़ार- काँटे )

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तुम कली पर निखार आने दो
देखना डाल ख़ुद झटक देगी

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ये धोखे देता आया है दिल को भी दुनिया को भी
इस के छल ने खार किया है सहरा में लैला को भी

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ग़म में हम सूरत-ए-गमख़ार नहीं पढ़ते हैं
इस लिए मीर के अश'आर नहीं पढ़ते हैं

मेरी आँखें तेरी तस्वीर से जा लगती हैं
सुब्ह उठकर सभी अख़बार नहीं पढ़ते हैं

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मैं ने अपनी ग़ज़लें खारिज कर डाली
सोचो मेरी जान तुम्हारा क्या होगा

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माना कि इस ज़मीं को न गुलज़ार कर सके
कुछ ख़ार कम तो कर गए गुज़रे जिधर से हम

22

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हुस्न बला का क़ातिल हो पर आख़िर को बेचारा है
इश्क़ तो वो क़ातिल जिस ने अपनों को भी मारा है

ये धोखे देता आया है दिल को भी दुनिया को भी
इस के छल ने खार किया है सहरा में लैला को भी

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'ख़ार' का मूल अर्थ काँटा है, जो छोटा होते हुए भी चुभन और दर्द का कारण बनता है। कविता में, यह शब्द जीवन की सूक्ष्म परंतु तीव्र चुनौतियों का प्रतीक बन जाता है, वे छोटी-छोटी तकलीफ़ें जो मिलकर एक बड़े भावनात्मक बोझ का रूप ले लेती हैं।

कवि अक्सर 'ख़ार' का प्रयोग अप्राप्त प्रेम की पीड़ा या दिल की संघर्षों को व्यक्त करने के लिए करते हैं। यह फूल की कोमलता के विपरीत होता है, जिससे सुंदरता और दर्द की द्वैतता उजागर होती है।

कविता में, 'ख़ार' जीवन के अनिवार्य दुखों का प्रतीक बन जाता है, जो हमें उन कठिनाइयों के साथ आने वाली सुंदरता की याद दिलाता है।