Meaning of

खौ़फ़

khauf • خوف

डर; भय

fear; dread

خوف; ڈر

Arabic

ऐ आसमान तेरे ख़ुदा का नहीं है ख़ौफ़ डरते हैं ऐ ज़मीन तेरे आदमी से हम — Unknown
भले हैं फ़ासले क़ुर्बत से ख़ौफ़ लगता है ये क्या बला है जो ऐसी विरानी क़ैद हुई — Beybaar
यहाँ मौत का ख़ौफ़ कुछ यूँँ है सब को कि जीने की ख़ातिर मरे जा रहे हैं — Sapna Moolchandani
हादसों की ज़द पे हैं तो मुस्कुराना छोड़ दें ज़लज़लों के ख़ौफ़ से क्या घर बनाना छोड़ दें — Waseem Barelvi
दुश्मनों की जफ़ा का ख़ौफ़ नहीं दोस्तों की वफ़ा से डरते हैं — Hafeez Banarasi
इस ख़ौफ़ में कि ख़ुद न भटक जाएँ राह में भटके हुओं को राह दिखाता नहीं कोई — Anwar Taban
परिंद क्यूँँ मिरी शाख़ों से ख़ौफ़ खाते हैं कि इक दरख़्त हूँ और साया-दार मैं भी हूँ — Asad Badayuni

ख़ौफ़ डर की आदिम भावना को दर्शाता है, जो दिल पर मंडराता है। कविता में, यह अनिश्चितता की फुसफुसाहट है, अज्ञात की ठंडक है। यह जीवन की अप्रत्याशितता के सामने मानव आत्मा की भेद्यता को उजागर करता है।

कवि ख़ौफ़ का उपयोग मानव चिंता की गहराई का पता लगाने के लिए करते हैं। यह आशा और निराशा के बीच का तनाव है, वह छाया जो प्रकाश को परिभाषित करती है। ख़ौफ़ आत्मा की मौन चीख है।

ख़ौफ़ वह छाया है जो प्रकाश के साथ नृत्य करती है, भावनाओं के नाजुक संतुलन की याद दिलाती है।