Meaning of

ग़म-ए-हयात

gham-e-hayaat • غم حیات

जीवन का दुःख; अस्तित्व का शोक

sorrow of life; existential grief

زندگی کا غم; وجودی غم

Persian

ग़म-ए-हयात ने आवारा कर दिया वर्ना थी आरज़ू कि तिरे दर पे सुब्ह ओ शाम करें — Majrooh Sultanpuri
तू भी ग़म-ए-हयात का है मारा और मैं भी चल इश्क़ छोड़ दर्द का रिश्ता बनाते हैं — Chetan Verma

यह वाक्यांश मानव स्थिति में निहित बोझ और दुखों पर एक गहरी, उदासीन चिंतन को उजागर करता है। यह अस्तित्व के भार को पकड़ता है, जहाँ प्रत्येक क्षण एक अंतर्निहित उदासी से भरा होता है जो व्यक्तिगत और सार्वभौमिक दोनों है।

कवियों द्वारा इस वाक्यांश का उपयोग अस्तित्वगत निराशा और समय के निरंतर प्रवाह के विषयों की खोज के लिए किया जाता है। इसे जीवन की यात्रा के साथ आने वाले अटल दुःख को व्यक्त करने के लिए बुलाया जाता है। यह क्षणिक आनंद के क्षणों के साथ विरोधाभास करता है, जो खुशी की क्षणभंगुर प्रकृति को उजागर करता है।

कविता में, 'ग़म-ए-हयात' जीवन के अंतर्निहित दुखों की एक मार्मिक याद दिलाता है, जो आनंद की क्षणभंगुर प्रकृति पर चिंतन करने का आग्रह करता है।