इलाज-ए-इश्क़ मुसलसल जो कर गए होतेदिलों के ज़ख़्म यक़ीनन ही भर गए होतेतुम्हारे इश्क़ ने मुझ को बचा लिया वर्नाग़म-ए-हयात से अब तक तो मर गए होते— SALIM RAZA REWA