Meaning of

ग़म-ए-हिज्र

gham-e-hijr • غم ہجر

वियोग का दुःख; जुदाई का ग़म

sorrow of separation; grief of parting

جدائی کا غم; فراق کا دکھ

Persian

आख़िर को मिरे हाल पे वो शख़्स भी रोया
कहता था जो कुछ भी नहीं दर्द-ए-ग़म-ए-हिज्राँ

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कभी दुख के मारे कभी शाद में
ये आँखें तरसती तेरी याद में

जो शाइ'र ग़म-ए-हिज्र से बच गया
उसे मुफ़लिसी खा गई बा'द में

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ऐ ग़में हिज्रां यूँँ रह रह के जलाओ न मुझे
वक़्त गुजरा तू भी आ आ के सताओ न मुझे

चैन से जीने दे मुझ को ओ मेरे ख़्वाब-ओ-ख़्याल
मिट चुकी कब की सुनो ऐसे मिटाओ न मुझे

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दर्द,आँसू,उदासी ग़म-ए-हिज्र है
और क्या चाहिए शा'इरी के लिए

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ग़म-ए-हिज्र तुम को भी ढोना नहीं था
तो मतलब मोहब्बत में रोना नहीं था

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मेरे हम उम्र साथी इश्क़ में गर टूट जाए दिल
ग़म-ए-हिज्राँ में इक महफ़िल सजाना, शा'इरी करना

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इस महीने में ग़म-ए-हिज्राँ मिला है
इस लिए नफ़रत है माह-ए-फ़रवरी से

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अश्क, तन्हाई, ग़म-ए-हिज्र, उदासी, वहशत
ये सभी लफ़्ज़ निचोड़े तो जा के इश्क़ बना

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ग़म-ए-हिज्र से मैं हूँ आशना मुझे आरज़ू-ए-विसाल है
ये इलाज और ये मुआलिजा मेरे दर्द कि तो दवा नहीं

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ये ग़म-ए-हिज्र जो मिरे दिल में
मैं जहाँ में तबीब बन कर हूँ

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आख़िर को मिरे हाल पे वो शख़्स भी रोया
कहता था जो कुछ भी नहीं दर्द-ए-ग़म-ए-हिज्राँ

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कभी दुख के मारे कभी शाद में
ये आँखें तरसती तेरी याद में

जो शाइ'र ग़म-ए-हिज्र से बच गया
उसे मुफ़लिसी खा गई बा'द में

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ग़म-ए-हिज्र उस गहरे दुःख को पकड़ता है जो किसी प्रियजन से अलगाव के साथ आता है। कविता में, यह गहरी भावना का स्रोत है, जो अक्सर लालसा और हानि के सार्वभौमिक मानव अनुभव को दर्शाता है।

कवि अक्सर इसका उपयोग प्रेम और हानि के विषयों को खोजने के लिए करते हैं। यह हृदय की लालसा और अधूरी इच्छाओं के दर्द के लिए एक रूपक के रूप में कार्य करता है।

ग़म-ए-हिज्र प्रेम की स्थायी शक्ति और जुदाई के अनिवार्य दुःख का प्रमाण है।