हाए कैसी हुई यार ये बेबसी
मुफ़लिसी में कटी जा रही ज़िन्दगी
चैन हमको कहीं पर मिला ही नहीं
इसलिए हम किए जा रहे शायरी
कष्ट गर जो मिले सामना तुम करो
हर समस्या का हल तो नहीं ख़ुदकुशी
मेरी दुनिया में कोई नहीं तेरे बिन
इसलिए हो रहा है मेरा मन दुखी
दुश्मनों की जो सफ़ में मेरा दोस्त है
इस तरह से निभाई गई दोस्ती
पीठ में मार के उसने ख़ंजर मेरे
ये बताया कि क्या होती है बुज़दिली
जीत तुम भी बदल जाओ ये वक़्त है
अब तो सारे हुए हैं यहॉं मतलबी
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