तुम को हमारी याद का सदक़ा नहीं रहा
तब से हमारा हाल भी अच्छा नहीं रहा
महँगा हुआ है सब यहाँ इक जान छोड़ कर
कुछ भी हमारे देश में सस्ता नहीं रहा
हम को भी हो गई है मोहब्बत किसी से फिर
वो इश्क़ आख़िरी भी हमारा नहीं रहा
रो रो के खो गई है मेरी आँख की नमी
अब तो हमारी आँख में दरिया नहीं रहा
— Jitendra "jeet"















