
भीगीं पलकें देख कर तू क्यूँँ रुका है ख़ुश हूँ मैं
वो तो मेरी आँख में कुछ आ गया है ख़ुश हूँ मैं
वो किसी के साथ ख़ुश था कितने दुख की बात थी
अब मेरे पहलू में आ कर रो रहा है ख़ुश हूँ मैं
— Zubair Ali Tabish
Other sher from the same pen
Shers of baaten shayari collection.
Voices in the same orbit
Poetry by feeling