
मैं क्या बताऊँ वो कितना क़रीब है मेरे
मेरा ख़याल भी उस को सुनाई देता है
वो जिस ने आँख अता की है देखने के लिए
उसी को छोड़ के सब कुछ दिखाई देता है
— Zubair Ali Tabish
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