Meaning of

ग़ुरबत

ghurbat • غربت

गरीबी; अभाव; दरिद्रता

poverty; destitution; lack

غربت; فقر; کمی

Arabic

दुआ अम्मी की है मेरी ये ग़ुर्बत भूल जाओगे
ख़ुदा इतना नवाज़ेगा मुसीबत भूल जाओगे

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ख़िलाफ़-ए-शर्त-ए-अना था वो ख़्वाब में भी मिले
मैं नींद नींद को तरसा मगर नहीं सोया

ख़िलाफ़-ए-मौसम-ए-दिल था कि थम गई बारिश
ख़िलाफ़-ए-ग़ुर्बत-ए-ग़म है कि मैं नहीं रोया

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कौन सूद-ओ-ज़ियाँ की दुनिया में
दर्द ग़ुर्बत का साथ देता है

जब मुक़ाबिल हों इश्क़ और दौलत
हुस्न दौलत का साथ देता है

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नतीजा फिर वही होगा सुना है साल बदलेगा
परिंदे फिर वही होंगे शिकारी जाल बदलेगा

वही हाकिम वही ग़ुर्बत वही क़ातिल वही ग़ासिब
बताओ कितने सालों में हमारा हाल बदलेगा

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ग़ुर्बत की ठंडी छाँव में याद आई उस की धूप
क़द्र-ए-वतन हुई हमें तर्क-ए-वतन के बा'द

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सच की डगर पे जब भी रक्खे क़दम किसी ने
पहले तो देखी ग़ुर्बत फिर तख़्त-ओ-ताज देखा

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इंसाँ के ज़मीरों को जला देती है ग़ुर्बत
कुछ बात है दर उस का अँधेरे में खुला है

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भले हों ख़ून के रिश्ते या दुनिया के फ़रिश्ते हों
ग़म-ए-ग़ुर्बत के मारों को सहारा कौन देता है

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किसी को शौक़ यूँँ होता नहीं ग़ुरबत में जीने का
यक़ीनन सामने उस के बड़ी  दुश्वारियाँ  होंगी

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दुआ अम्मी की है मेरी ये ग़ुर्बत भूल जाओगे
ख़ुदा इतना नवाज़ेगा मुसीबत भूल जाओगे

तड़पता दिल सुलगती जाँ जिगर ज़ख़्मी उगलता ख़ूँ
अगर जो देख लोगे तुम मोहब्बत भूल जाओगे

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दुआ अम्मी की है मेरी ये ग़ुर्बत भूल जाओगे
ख़ुदा इतना नवाज़ेगा मुसीबत भूल जाओगे

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ख़िलाफ़-ए-शर्त-ए-अना था वो ख़्वाब में भी मिले
मैं नींद नींद को तरसा मगर नहीं सोया

ख़िलाफ़-ए-मौसम-ए-दिल था कि थम गई बारिश
ख़िलाफ़-ए-ग़ुर्बत-ए-ग़म है कि मैं नहीं रोया

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ग़ुरबत भौतिक गरीबी की कठोर वास्तविकता को पकड़ता है, फिर भी कविता में, यह अक्सर एक आत्मिक या भावनात्मक शून्यता तक फैलता है। यह केवल धन की अनुपस्थिति को नहीं, बल्कि संतोष की अनुपस्थिति को भी दर्शाता है।

कवि ग़ुरबत का उपयोग सहानुभूति जगाने और मानव स्थिति को उजागर करने के लिए करते हैं। यह लालसा और अर्थ की खोज के विषयों का पता लगाने के लिए एक पृष्ठभूमि के रूप में कार्य करता है।

ग़ुरबत उन शून्यों की मार्मिक याद दिलाता है जिन्हें भौतिक संपत्ति नहीं भर सकती।