Meaning of

गोश

gosh • گوش

कान; ध्यान

ear; attention

کان; توجہ

Persian

अगर्चे गोशागुज़ी हूँ मैं शाइरों में " मीर" प मेरे शोर ने रू ए ज़मीं तमाम किया — Meer Taqi Meer
रक्खी हुई है गोशे में दिल के सँभाल कर तस्वीर तू ने साथ जो खिंचवाई थी मेरे — Shajar Abbas
नींद तो दर्द के बिस्तर पे भी आ सकती है उन की आग़ोश में सर् हो ये ज़रूरी तो नहीं — Sultan
नहीं इस खुली फ़ज़ा में कोई गोशा-ए-फ़राग़त ये जहाँ अजब जहाँ है न क़फ़स न आशियाना — Allama Iqbal
तेरी नज़रों से मिलती हैं ख़ामोशियाँ दिल में क्यूँ रखता है इतनी सरगोशियाँ — Danish Balliavi
यूँँ है असर तेरी ये हम-आग़ोशी का घुटता है दम सा पुर-फ़ज़ा में अब मिरा — Sohit Singla
फ़ासलों से जो सँभाले हैं रखा इक शख़्स को टूट जाता जो मिरी आग़ोश में आता कभी — Amol

गोश, अपने शाब्दिक अर्थ में, कान को संदर्भित करता है, जो सुनने और ध्यान का प्रतीक है। कविता में, यह अक्सर वास्तव में सुनने और समझने की क्रिया को दर्शाता है, जो दुनिया और उसकी सूक्ष्मताओं के साथ गहरे जुड़ाव का प्रतीक है।

कवि 'गोश' का उपयोग सुनने के महत्व को उजागर करने के लिए करते हैं। यह अज्ञानता और उदासीनता के विपरीत होता है, जो ध्यानपूर्ण जुड़ाव की सुंदरता को उजागर करता है। यह शब्द अक्सर अंतरंगता और संबंध की भावना को जागृत करता है।

गोश हमें गहराई से सुनने और हमारे आसपास की दुनिया से जुड़ने के लिए आमंत्रित करता है। यह ध्यानपूर्ण उपस्थिति की शक्ति की याद दिलाता है।