Meaning of

ज़फ़र

zafar • ظفر

विजय; जीत

victory; triumph

فتح; کامیابی

Arabic

उस पे पत्थर खा के क्या बीती 'ज़फ़र' देखेगा कौन फल तो सब ले जाएँगे ज़ख़्म-ए-शजर देखेगा कौन — Zafar Gorakhpuri
लड़ाकर हरे को वो भगवे से देखो जफर अब कबूतर उड़ाने लगा है — Kiran bhargav04
ऐ रज़ा कुछ लड़कियाँ जो घर की ज़ीनत थीं कभी रौनक़-ए-बाज़ार होती जा रही हैं आज कल — SALIM RAZA REWA
मौत के साथ हुई है मिरी शादी सो 'ज़फ़र' उम्र के आख़िरी लम्हात में दूल्हा हुआ मैं — Zafar Iqbal
कौन डूबेगा किसे पार उतरना है 'ज़फ़र' फ़ैसला वक़्त के दरिया में उतर कर होगा — Ahmad Zafar
यूँँ पतंगों की तरह जो उड़ रहा है तू 'ज़फ़र' जब गिरेगा फ़र्श पे तब होश आएगा तुझे — ZafarAli Memon
कर चुके हम बिहार से तौबा भाड़ में जाए अब मुज़फ़्फ़रपुर — A R Sahil "Aleeg"

ज़फ़र विजय की मधुरता को दर्शाता है, एक ऐसा विजय क्षण जो व्यक्तिगत और सामूहिक दोनों होता है। कविता में, यह अक्सर संघर्ष के समापन और बाधाओं को पार करने की खुशी को दर्शाता है।

कवि 'ज़फ़र' का उपयोग सफलता के क्षणों और उन्हें प्राप्त करने के लिए आवश्यक दृढ़ता का जश्न मनाने के लिए करते हैं। यह आशा और पूर्ति का शब्द है, जो अक्सर निराशा के विपरीत होता है।

ज़फ़र आशा का एक प्रकाशस्तंभ है, जो क्षितिज के परे प्रतीक्षा कर रही विजयों की याद दिलाता है।